डिजिटल हेराफेरी का बड़ा खेल: जबलपुर में 3.5 करोड़ का धान खरीदी घोटाला, पोर्टल पर चढ़ा दी फर्जी उपज
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले से भ्रष्टाचार का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सरकारी खरीद प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के मझौली तहसील स्थित एक उपार्जन केंद्र पर अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से 3.5 करोड़ रुपये का धान खरीदी घोटाला उजागर हुआ है। इस घोटाले में बिना एक दाना खरीदे ही कागजों और ऑनलाइन पोर्टल पर हजारों क्विंटल धान की फर्जी एंट्री कर दी गई।
घोटाले का तरीका: ‘हवा’ में खरीदी गई धान
यह पूरा खेल तकनीकी पैंतरेबाजी और ई-उपार्जन पोर्टल के दुरुपयोग पर आधारित था। जांच में पाया गया कि केंद्र प्रभारी और कंप्यूटर ऑपरेटर ने मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची:
- फर्जी ऑनलाइन एंट्री: उपार्जन केंद्र पर भौतिक रूप से धान की कोई आवक नहीं हुई, लेकिन पोर्टल पर लगभग 15,000 क्विंटल धान की आवक दिखा दी गई।
- किसानों के नाम का दुरुपयोग: उन किसानों के खातों और पंजीयन का उपयोग किया गया जिन्होंने वास्तव में अपनी उपज वहां बेची ही नहीं थी। कुछ मामलों में तो मृत किसानों या उन लोगों के नाम पर भी प्रविष्टि कर दी गई जिनके पास उतनी जमीन ही नहीं थी।
- भुगतान का प्रयास: फर्जी एंट्री के माध्यम से सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये के भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, ताकि यह पैसा सीधे बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों के खातों में जा सके।
खुलासा कैसे हुआ?
घोटाले की भनक तब लगी जब खाद्य विभाग और जिला प्रशासन की टीम ने स्टॉक का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया।
- गायब मिला स्टॉक: पोर्टल के अनुसार गोदामों और केंद्रों पर जितना धान होना चाहिए था, मौके पर उसका आधा भी नहीं मिला।
- संदेहास्पद एंट्री: जब टीम ने कंप्यूटर रिकॉर्ड खंगाले, तो पाया कि एक ही दिन में और बहुत कम समय के अंतराल पर बड़ी मात्रा में धान की एंट्री की गई थी, जो व्यावहारिक रूप से असंभव था।
- कलेक्टर की कार्रवाई: जबलपुर कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की, जिसकी रिपोर्ट में 3.5 करोड़ रुपये के गबन की पुष्टि हुई।
कानूनी कार्रवाई और एफआईआर
जांच रिपोर्ट आने के तुरंत बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है:
- नामजद एफआईआर: मझौली थाने में केंद्र प्रभारी, कंप्यूटर ऑपरेटर और तीन अन्य सहयोगियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटनीति और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
- बैंक खाते फ्रीज: आरोपियों और संबंधित फर्मों के बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया है ताकि सरकारी पैसा वापस निकाला जा सके।
- गिरफ्तारी की तैयारी: पुलिस की एक टीम आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है, जो फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।
प्रणाली पर उठते सवाल
यह घोटाला कई अनसुलझे सवाल छोड़ गया है:
- सत्यापन की कमी: पटवारी और कृषि विभाग के अधिकारियों ने फसल के रकबे का सही सत्यापन क्यों नहीं किया?
- पोर्टल की सुरक्षा: ई-उपार्जन पोर्टल पर ऐसी फर्जी प्रविष्टियों को रोकने के लिए कोई ‘चेक एंड बैलेंस’ सिस्टम क्यों नहीं था?
- अधिकारियों की भूमिका: क्या इस बड़े खेल में जिला स्तर के किसी बड़े अधिकारी का संरक्षण प्राप्त था?
निष्कर्ष
जबलपुर का यह धान घोटाला किसानों के हक पर डाका डालने जैसा है। जहाँ एक ओर असली किसान अपनी उपज बेचने के लिए कतारों में खड़ा रहता है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्ट तंत्र कागजों पर करोड़ों का वारा-न्यारा कर रहा है। प्रशासन का दावा है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और पूरी राशि की वसूली की जाएगी। यह घटना आने वाले समय में खरीदी केंद्रों पर डिजिटल निगरानी को और सख्त करने की आवश्यकता पर जोर देती है।




