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बरेला सड़क त्रासदी: मौत का आंकड़ा पहुंचा 5, मातम में बदला मजदूरों का आशियाना

जबलपुर। संस्कारधानी के बरेला थाना अंतर्गत नेशनल हाईवे-30 पर रविवार को हुए भीषण सड़क हादसे ने आज एक और दुखद मोड़ ले लिया है। इलाज के दौरान तीन और महिलाओं की मौत के साथ ही इस हादसे में जान गंवाने वालों की कुल संख्या अब 5 हो गई है। यह हादसा तब हुआ जब सड़क किनारे बैठकर खाना खा रहे खेतिहर मजदूरों के एक समूह को बेकाबू कार ने रौंद दिया था।

घटना का आंखों देखा हाल

यह दर्दनाक वाकया रविवार दोपहर का है। मंडला की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार सफेद रंग की लग्जरी कार अचानक अनियंत्रित हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार की गति इतनी अधिक थी कि चालक उस पर से नियंत्रण खो बैठा और कार सीधे सड़क किनारे बने कच्चे ढाबे के पास जा घुसी, जहाँ मजदूर दोपहर का भोजन कर रहे थे।

हादसा इतना भीषण था कि दो महिलाओं की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 6 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। आज सुबह मेडिकल कॉलेज अस्पताल से आई रिपोर्ट के अनुसार, जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही तीन अन्य महिलाओं ने भी दम तोड़ दिया है।

हादसे के प्रमुख बिंदु

  • मृतकों की पहचान: सभी मृतक महिलाएं और पुरुष मूल रूप से डिंडोरी और मंडला जिले के रहने वाले श्रमिक बताए जा रहे हैं, जो बरेला के पास खेतों में मजदूरी करने आए थे।
  • तेज रफ्तार और लापरवाही: पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कार चालक नशे में था या उसे झपकी आ गई थी, जिसकी वजह से वह स्टीयरिंग पर नियंत्रण नहीं रख सका। कार की रफ्तार 100 किमी/घंटा से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
  • हादसे के बाद का मंजर: टक्कर के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए अपनी गाड़ियों और एंबुलेंस की मदद से घायलों को विक्टोरिया और मेडिकल अस्पताल पहुँचाया।
  • प्रशासनिक सहायता: जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को तत्काल सहायता के तौर पर आर्थिक मदद का आश्वासन दिया है। रेडक्रॉस और मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से घायलों के इलाज का खर्च वहन किया जा रहा है।
  • आरोपी चालक की गिरफ्तारी: पुलिस ने दुर्घटनाकारी कार को जब्त कर लिया है और चालक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है।

हाईवे पर सुरक्षा के उठते सवाल

बरेला के पास नेशनल हाईवे-30 पर यह कोई पहला हादसा नहीं है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस पैच पर ‘ब्लैक स्पॉट’ होने के बावजूद प्रशासन ने गति अवरोधक या साइन बोर्ड नहीं लगाए हैं।

  • ब्लैक स्पॉट: जहाँ यह हादसा हुआ, वहां सड़क का मोड़ काफी तीखा है।
  • अतिक्रमण: हाईवे के किनारे अवैध रूप से चल रहे ढाबों और झुग्गियों के कारण दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि वहां लोग असुरक्षित तरीके से बैठते हैं।

मानवीय क्षति और शोक की लहर

इस हादसे ने उन मासूम बच्चों के सिर से साया उठा दिया है, जिनकी माताएं मजदूरी कर परिवार का पेट पाल रही थीं। जबलपुर मेडिकल कॉलेज में आज मृतकों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है, जिसके बाद शवों को उनके गृह ग्राम (मंडला/डिंडोरी) भेजा जाएगा। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि हाईवे किनारे असुरक्षित स्थानों पर बैठने या खड़े होने से बचें।

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