जबलपुर में मौसम का यू-टर्न: 72 घंटों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और ओलावृष्टि की आशंका
जबलपुर। मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर और आसपास के जिलों में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। कड़ाके की ठंड के बीच अब बादलों के डेरे ने शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जबलपुर संभाग के लिए अगले 48 से 72 घंटों का विशेष बुलेटिन जारी किया है, जिसमें 29, 30 और 31 जनवरी को शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश (Heavy Rainfall) की संभावना जताई गई है।
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण मौसम में आए इस बदलाव से न केवल तापमान में गिरावट आएगी, बल्कि फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
क्यों बदला मौसम का मिजाज?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत में सक्रिय एक तीव्र पश्चिमी विक्षोभ और अरब सागर से आ रही नमी के कारण मध्य भारत के ऊपर एक ‘प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण’ (Induced Cyclonic Circulation) बन गया है। इसके परिणामस्वरूप:
- बादलों की आवाजाही: जबलपुर में आज सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए हुए हैं, जिससे दिन के तापमान में 3-4 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है।
- ओलावृष्टि की चेतावनी: मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के साथ-साथ संभाग के कुछ हिस्सों में ओले (Hailstorm) भी गिर सकते हैं, जो विशेष रूप से खुली खड़ी फसलों के लिए घातक साबित हो सकते हैं।
किसानों पर मंडराया संकट: रबी की फसलें खतरे में
जनवरी के अंत में होने वाली यह बेमौसम बारिश किसानों के लिए “आफत की बारिश” साबित हो सकती है। वर्तमान में खेतों में गेहूँ, चना और मटर की फसलें पकने की स्थिति में हैं या फूल आने के चरण में हैं।
- मटर और चना: भारी बारिश और ओलावृष्टि से मटर की फलियों और चने के पौधों को सर्वाधिक नुकसान पहुँचता है। जलभराव के कारण जड़ें सड़ने का डर भी रहता है।
- गेहूँ: यदि बारिश के साथ तेज हवाएं चलती हैं, तो गेहूँ की फसल आड़ी गिर सकती है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।
- कृषि विभाग की सलाह: जिला कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें और फिलहाल किसी भी प्रकार के कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव न करें।
आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर असर
बेमौसम बारिश और कोहरे के कारण शहर की रफ्तार भी धीमी पड़ने वाली है।
- ट्रैफिक और विजिबिलिटी: भारी बारिश और बादलों के कारण सड़कों पर विजिबिलिटी कम हो सकती है। प्रशासन ने वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
- बीमारियों का खतरा: अचानक बढ़ी नमी और ठंड के कारण वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ सकती है। डॉक्टरों ने बच्चों और बुजुर्गों को गीले मौसम से बचने की सलाह दी है।
- कार्यक्रमों पर असर: 30 जनवरी को आयोजित होने वाली ‘न्याय पद यात्रा’ और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों पर भी बारिश का साया मंडरा रहा है।
प्रशासन की तैयारी: आपदा प्रबंधन अलर्ट
कलेक्टर कार्यालय ने नगर निगम और आपदा प्रबंधन टीम को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए ड्रेनेज टीम को सक्रिय किया गया है। साथ ही, बिजली विभाग को भी निर्देशित किया गया है कि वे पेड़ों की टहनियों और ढीले तारों की जांच कर लें ताकि गरज-चमक के दौरान बिजली गुल होने की समस्या न आए।
निष्कर्ष
जबलपुर के लिए आने वाले तीन दिन (29 से 31 जनवरी) काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। प्रकृति का यह मिजाज जहाँ एक ओर शहर को भीषण ठंड की चपेट में ले लेगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर चोट कर सकता है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम विभाग के अपडेट्स का पालन करें और गरज-चमक के समय ऊंचे पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।





