जबलपुर में सवर्ण समाज का हल्लाबोल: UGJ एक्ट में संशोधन के विरोध में कलेक्ट्रेट का घेराव, सड़कों पर उतरा जनसैलाब, कानून वापसी की हुंकार
जबलपुर। मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर आज एक बार फिर बड़े विरोध प्रदर्शन का गवाह बनी। ‘स्वर्ण समाज’ (सवर्ण समाज) के बैनर तले हजारों की संख्या में लोगों ने एकत्रित होकर कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों का यह आक्रोश UGJ एक्ट (अवैध गतिविधियों/विशेष कानून) में प्रस्तावित संशोधनों के विरोध में था। समाज के नेताओं का आरोप है कि इस कानून के नए प्रावधानों का दुरुपयोग सवर्ण वर्ग को निशाना बनाने और उन्हें बिना किसी ठोस आधार के कानूनी पचड़ों में फंसाने के लिए किया जा सकता है।
प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के सामने की सड़क घंटों जाम रही, जिससे शहर के मध्य क्षेत्र में यातायात पूरी तरह ठप्प हो गया।
घेराव और विरोध का मुख्य कारण
सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। उनके विरोध के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- कठोर प्रावधानों पर आपत्ति: प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि कानून में किए गए नए संशोधन पुलिस को असीमित शक्तियां देते हैं, जिससे ‘बिना वारंट’ गिरफ्तारी और ‘कठिन जमानत’ जैसी शर्तें निर्दोष लोगों के लिए मुसीबत बन सकती हैं।
- दुरुपयोग की आशंका: समाज का मानना है कि पहले भी कई विशेष कानूनों का दुरुपयोग हुआ है, और UGJ एक्ट के वर्तमान स्वरूप से सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा है।
- समान नागरिक संहिता की मांग: ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि कानून सभी के लिए एक समान होने चाहिए और किसी विशेष वर्ग को लक्षित करने वाले संशोधनों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
प्रदर्शन का घटनाक्रम: कलेक्ट्रेट बना छावनी
सुबह 11:00 बजे से ही शहर के विभिन्न हिस्सों से सवर्ण समाज के लोग सिविक सेंटर में एकत्रित होना शुरू हुए। यहाँ से एक विशाल रैली के रूप में प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे।
- नारेबाजी: कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर प्रदर्शनकारियों ने शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और “काला कानून वापस लो” के नारे लगाए।
- सुरक्षा व्यवस्था: प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के चारों ओर बैरिकेड्स लगा दिए थे। भारी संख्या में पुलिस बल और ‘वज्र’ वाहन तैनात किए गए थे ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।
- अधिकारियों को ज्ञापन: काफी देर तक चले हंगामे के बाद, प्रशासनिक अधिकारियों ने गेट पर आकर प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया और उनकी मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
सामाजिक संगठनों का समर्थन
इस घेराव को केवल सवर्ण समाज के संगठनों का ही नहीं, बल्कि कई व्यापारिक और नागरिक संगठनों का भी समर्थन मिला। वक्ताओं ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि यदि सरकार ने 15 दिनों के भीतर इन संशोधनों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन प्रदेश व्यापी रूप लेगा और आने वाले समय में उग्र प्रदर्शन किए जाएंगे।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
जिला प्रशासन की ओर से ज्ञापन लेने वाले अधिकारी ने कहा कि ज्ञापन को उचित माध्यम से राज्य और केंद्र सरकार तक भेज दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना है, न कि किसी विशेष समुदाय को परेशान करना। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की और जाम खुलवाने के लिए डायवर्जन प्लान लागू किया।
निष्कर्ष
जबलपुर में हुआ यह विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि सवर्ण समाज कानूनी बदलावों को लेकर काफी सतर्क और मुखर है। UGC एक्ट में संशोधनों को लेकर उपजा यह विवाद अब आने वाले दिनों में और गहरा सकता है, विशेषकर यदि शासन की ओर से कोई स्पष्टीकरण या संवाद की पहल नहीं की गई।



