जबलपुर। संस्कारधानी के नगर निगम मुख्यालय में पिछले कई दिनों से चल रहा विवाद अब एक बड़े जनांदोलन का रूप ले चुका है। मामला नगर निगम में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन और उनकी संख्या में भारी विसंगति से जुड़ा है। विपक्ष का आरोप है कि नगर निगम में ‘नकली कर्मी-असली वेतन’ का खेल चल रहा है, जिसके जरिए हर महीने करोड़ों रुपये का चूना सरकारी खजाने को लगाया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला? (भ्रष्टाचार की जड़)
नगर निगम जबलपुर ने शहर की सफाई, उद्यानों के रखरखाव और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए निजी कंपनियों को आउटसोर्सिंग का ठेका दे रखा है। नियमों के मुताबिक, कंपनियों को तय संख्या में कर्मचारी उपलब्ध कराने होते हैं और निगम उनका भुगतान करता है। लेकिन हाल ही में हुए एक ऑडिट और जमीनी पड़ताल में जो खुलासे हुए, उन्होंने सबको चौंका दिया है।
हंगामे के मुख्य बिंदु
- ‘घोस्ट एम्प्लॉइज’ (फर्जी कर्मचारी) का घोटाला: विपक्ष का सबसे बड़ा आरोप यह है कि कागजों पर 500 कर्मचारी दिखाए जा रहे हैं, जबकि मौके पर केवल 200 ही काम कर रहे हैं। बाकी के 300 फर्जी नामों के बैंक खातों में वेतन जमा हो रहा है, जो बाद में अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच बंदरबांट हो जाता है।
- वेतन कटौती की मार: जो असली कर्मचारी काम कर रहे हैं, उनकी शिकायत है कि ठेकेदार उनके वेतन से P.F. और ESI के नाम पर बड़ी कटौती कर रहे हैं, लेकिन यह राशि उनके खातों में जमा नहीं हो रही है।
- हाजिरी में डिजिटल धांधली: बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली को दरकिनार कर मैन्युअल हाजिरी रजिस्टर का उपयोग किया जा रहा है, ताकि फर्जी हाजिरी लगाई जा सके। पार्षदों का आरोप है कि इसमें निगम के कुछ बड़े अधिकारियों की मिलीभगत है।
- कांग्रेस का अनिश्चितकालीन धरना: नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्षदों ने नगर निगम परिसर में ही टेंट लगाकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। उनकी मांग है कि जब तक आउटसोर्सिंग कंपनियों के पिछले 2 साल के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक भुगतान रोक दिया जाए।
- प्रशासन का बचाव: दूसरी ओर, नगर निगम आयुक्त का कहना है कि हाजिरी प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए ‘आधार बेस्ड अटेंडेंस’ लागू की जा रही है और शिकायतों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है।
हंगामे का असर और अगली रणनीति
नगर निगम में चल रहे इस हंगामे के कारण शहर की सफाई व्यवस्था और जल आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। विपक्षी दल ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर दोषियों पर FIR दर्ज नहीं की गई, तो वे नगर निगम का घेराव कर तालाबंदी करेंगे। साथ ही, इस मामले को लेकर भोपाल स्थित नगरीय प्रशासन विभाग को भी विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई है।
जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग
जबलपुर की जनता का कहना है कि वे भारी-भरकम ‘प्रॉपर्टी टैक्स’ और ‘स्वच्छता कर’ देते हैं, लेकिन वह पैसा विकास कार्यों के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। इस घोटाले ने निगम की साख पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।



