डॉक्टर बनने का सपना अब नहीं रहेगा अधूरा: NEET पास छात्रों को ₹80 लाख तक का ‘एजुकेशन लोन’ देगी सरकार; CM की जबलपुर में बड़ी घोषणा
जबलपुर: मध्य प्रदेश के मेधावी छात्रों के लिए चिकित्सा जगत की राह अब और भी आसान होने वाली है। शनिवार, 24 जनवरी 2026 को जबलपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के छात्र-छात्राओं को एक बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि चिकित्सा शिक्षा (MBBS) को बढ़ावा देने के लिए सरकार अब NEET (National Eligibility cum Entrance Test) पास करने वाले योग्य छात्रों को 70 से 80 लाख रुपये तक का ‘एजुकेशन लोन’ उपलब्ध कराएगी। इस ऐतिहासिक निर्णय से विशेष रूप से उन मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी जो निजी मेडिकल कॉलेजों की भारी-भरकम फीस वहन नहीं कर पाते थे।
घोषणा के मुख्य बिंदु: क्या है सरकार की योजना?
जबलपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “धन के अभाव में किसी भी मेधावी बेटे या बेटी का डॉक्टर बनने का सपना नहीं टूटना चाहिए।” सरकार की इस नई ऋण योजना की रूपरेखा इस प्रकार है:
- भारी-भरकम ऋण सुविधा: नीट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद निजी या सरकारी कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को ट्यूशन फीस, हॉस्टल और अन्य खर्चों के लिए ₹70 लाख से ₹80 लाख तक का ऋण दिया जाएगा।
- सरकार बनेगी ‘गारंटर’: अक्सर बैंकों से इतना बड़ा लोन लेने के लिए माता-पिता को अपनी जमीन या घर गिरवी रखना पड़ता है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि छात्रों की ओर से राज्य सरकार स्वयं ‘गारंटर’ की भूमिका निभाएगी।
- भुगतान का लचीला तरीका: यह कोई सामान्य ऋण नहीं होगा। छात्र को पढ़ाई के दौरान एक भी पैसा वापस नहीं करना होगा। ऋण की वापसी (Repayment) तभी शुरू होगी जब छात्र अपनी डिग्री पूरी कर लेगा और डॉक्टर के रूप में सेवा देना शुरू कर देगा।
क्यों पड़ी इस योजना की जरूरत?
भारत में चिकित्सा शिक्षा, विशेषकर निजी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई का खर्च करोड़ों में पहुँच गया है। कई छात्र NEET में अच्छी रैंक लाने के बावजूद केवल इसलिए डॉक्टर नहीं बन पाते क्योंकि वे लाखों रुपये की वार्षिक फीस नहीं भर सकते।
- सीटों का सदुपयोग: कई बार आर्थिक तंगी के कारण निजी कॉलेजों की सीटें खाली रह जाती हैं या उन पर केवल संपन्न परिवारों के बच्चे ही पहुँच पाते हैं। यह योजना ‘मेरिट’ को ‘मनी’ पर प्राथमिकता देगी।
- डॉक्टरों की कमी दूर करना: प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी है। इस योजना के माध्यम से सरकार डॉक्टरों की एक नई खेप तैयार करना चाहती है।
जबलपुर बनेगा चिकित्सा शिक्षा का केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि जबलपुर की अपनी एक अलग पहचान है। यहाँ ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज’ जैसे प्रतिष्ठित संस्थान हैं। इस योजना के लागू होने से जबलपुर के आसपास के जिलों (महाकौशल अंचल) के हजारों ग्रामीण युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार राज्य के मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार कर रही है।
शर्तें और पात्रता (प्रस्तावित)
हालांकि विस्तृत गाइडलाइंस जल्द जारी की जाएंगी, लेकिन सूत्रों के अनुसार:
- छात्र को मध्य प्रदेश का मूल निवासी होना अनिवार्य होगा।
- NEET परीक्षा के माध्यम से मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेना आवश्यक होगा।
- संभवतः, ऋण लेने वाले छात्रों को एक निश्चित समय के लिए सरकारी अस्पतालों या ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएँ देने का ‘बॉन्ड’ (Bond) भी भरना पड़ सकता है।
छात्रों और अभिभावकों में उत्साह
जबलपुर के मेडिकल कोचिंग संस्थानों में तैयारी कर रहे छात्रों ने इस घोषणा का जोरदार स्वागत किया है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार के ‘गारंटर’ बनने से बैंकों के चक्कर काटने और संपत्ति गिरवी रखने की चिंता खत्म हो जाएगी।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह पहल मध्य प्रदेश को ‘हेल्थ हब’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि यह योजना पारदर्शिता के साथ लागू होती है, तो आने वाले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश में डॉक्टरों की कमी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और हर प्रतिभावान युवा के पास ‘डॉक्टर’ बनने का वास्तविक अवसर होगा।




