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जबलपुर पर बिजली का ‘पॉवर शॉक’: 10% तक बढ़ सकते हैं दाम; जेब पर पड़ेगा ₹30 से ₹100 तक का अतिरिक्त बोझ

जबलपुर: संस्कारधानी के नागरिकों के लिए नया साल 2026 राहत के बजाय महंगाई की सौगात लेकर आया है। मध्य प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम), जिसमें जबलपुर मुख्यालय वाली ‘पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी’ भी शामिल है, ने प्रदेश के विद्युत नियामक आयोग (MPERC) के पास बिजली की दरों में 10.19% तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव पेश किया है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो जबलपुर के घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बिल में ₹30 से लेकर ₹100 (खपत के अनुसार) तक की सीधी वृद्धि हो सकती है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम? कंपनियों का तर्क

बिजली कंपनियों ने नियामक आयोग को दी गई अपनी ‘टैरिफ याचिका’ (Tariff Petition) में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग ₹6,044 करोड़ का घाटा दर्शाया है। कंपनियों का कहना है कि:

  • पुराना घाटा: पिछले वर्षों के बकाया और परिचालन खर्चों के कारण घाटा बढ़ा है।
  • कोयले और परिवहन की लागत: हालांकि वैश्विक स्तर पर कुछ राहत है, लेकिन स्थानीय स्तर पर परिवहन और रख-रखाव का खर्च बढ़ने का हवाला दिया गया है।
  • स्मार्ट मीटर का बोझ: शहर में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों की लागत का एक हिस्सा भी उपभोक्ताओं से वसूलने की तैयारी है।

आम जनता पर कैसा होगा असर?

जबलपुर के मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी ‘दोहरी मार’ की तरह है।

  1. घरेलू बिल: यदि आप महीने में 150 से 200 यूनिट बिजली जलाते हैं, तो आपके बिल में ₹30 से ₹50 तक का इजाफा हो सकता है। 300 यूनिट से ज्यादा खपत करने वालों पर यह बोझ ₹100 के पार जा सकता है।
  2. फिक्स्ड चार्ज और सरचार्ज: केवल प्रति यूनिट रेट ही नहीं, बल्कि फिक्स्ड चार्ज (Fixed Charges) में भी वृद्धि प्रस्तावित है।

जबलपुर में विरोध के स्वर

इस घोषणा के बाद जबलपुर के ‘नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच’ और अन्य सामाजिक संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली कंपनियां अपना प्रबंधन सुधारने के बजाय अपनी “अक्षमता और फिजूलखर्ची” का बोझ जनता पर डाल रही हैं।

  • विवादित घाटा: बिजली मामलों के जानकारों का दावा है कि कंपनियों ने ‘काल्पनिक घाटा’ दिखाया है। यदि सही तरीके से गणना की जाए, तो कंपनियां मुनाफे में हैं और दाम घटाने चाहिए।
  • जनसुनवाई: जबलपुर में 24 फरवरी 2026 को इस संबंध में जनसुनवाई (Public Hearing) होने जा रही है, जहाँ नागरिक अपनी आपत्तियाँ दर्ज करा सकेंगे।

बचाव का रास्ता: समाधान योजना का लाभ उठाएं

बढ़ती दरों के बीच राहत की एक खबर यह है कि मध्य प्रदेश सरकार ने ‘समाधान योजना’ की अवधि 31 जनवरी 2026 तक बढ़ा दी है।

  • यदि आपका पुराना बिल बकाया है, तो आप एकमुश्त भुगतान कर 100% तक सरचार्ज (ब्याज) माफ करवा सकते हैं।
  • 1 फरवरी से यह छूट कम होकर 90% तक रह जाएगी।

निष्कर्ष

जबलपुर में बिजली अब केवल ‘जरूरत’ नहीं, बल्कि ‘महंगा शौक’ बनती जा रही है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली इन नई दरों पर अंतिम फैसला फरवरी के अंत तक आएगा। तब तक उपभोक्ताओं के पास अपनी बात आयोग के सामने रखने का मौका है।

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