बिजली विभाग का ‘ऑपरेशन रिकवरी’: जबलपुर में 174 बड़े बकायादारों के बैंक खाते फ्रीज, करोड़ों की वसूली के लिए विभाग सख्त
मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने जबलपुर शहर में बकाया राजस्व की वसूली के लिए अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार किया है। लंबे समय से बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद बिजली बिल जमा न करने वाले 174 बड़े बकायादारों (High-Value Defaulters) के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विभाग ने उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। बिजली विभाग की इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने शहर के उन उपभोक्ताओं में हड़कंप मचा दिया है जो लाखों रुपये का बिल दबाकर बैठे थे।
कार्रवाई का कारण: करोड़ों का बकाया और वित्तीय संकट
बिजली कंपनी के अनुसार, जबलपुर शहर वृत्त में करोड़ों रुपये का बिजली बिल बकाया है। कई उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्होंने पिछले एक-दो साल से एक भी रुपया जमा नहीं किया है।
- नोटिस की अनदेखी: विभाग ने इन 174 उपभोक्ताओं को पहले धारा-135 के तहत नोटिस जारी किए थे और उन्हें किश्तों में पैसा जमा करने का विकल्प भी दिया था, लेकिन उपभोक्ताओं ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
- राजस्व लक्ष्य: वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण को देखते हुए, विभाग पर ऊपर से दबाव है कि वे शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करें ताकि बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखा जा सके।
कैसे की गई कार्रवाई?
बिजली विभाग ने राजस्व वसूली के लिए भू-राजस्व अधिनियम (Land Revenue Act) की शक्तियों का उपयोग किया है:
- तहसीलदार और बैंकों को पत्र: विभाग ने संबंधित बैंकों को कानूनी पत्र लिखकर इन उपभोक्ताओं के खातों से लेन-देन पर रोक लगा दी है। जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं होता, ये खाताधारक न तो पैसा निकाल पाएंगे और न ही किसी को ट्रांसफर कर पाएंगे।
- अचल संपत्ति की कुर्की की तैयारी: विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि बैंक खाते फ्रीज होने के बाद भी राशि जमा नहीं की गई, तो अगला कदम उनकी संपत्तियों (मकान, दुकान या वाहन) की कुर्की और नीलामी का होगा।
कुर्की और गिरफ्तारी का डर
इस अभियान के तहत केवल खाते फ्रीज करना ही एकमात्र कदम नहीं है। बिजली कंपनी ने 3 बड़े डिफॉल्टर्स की सूची तैयार की है जिनके खिलाफ ‘आरआरसी’ (Recovery Record Certificate) जारी कर उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह पहली बार है जब विभाग केवल बिजली काटने तक सीमित न रहकर सीधे कानूनी और फौजदारी कार्रवाई कर रहा है।
उपभोक्ताओं के लिए विकल्प और अपील
बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) ने स्पष्ट किया है कि:
- एकमुश्त समाधान: जो उपभोक्ता अपना खाता बहाल (Unfreeze) कराना चाहते हैं, उन्हें पूरी बकाया राशि या कम से कम 50% राशि तत्काल जमा कर विभाग से क्लियरेंस लेना होगा।
- सतर्कता: विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे समय पर बिल का भुगतान करें ताकि उनके साथ ऐसी अपमानजनक स्थिति पैदा न हो।
आंदोलन और प्रतिक्रिया
इस सख्ती का कुछ व्यापारिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने विरोध भी शुरू किया है। उनका तर्क है कि कोरोना काल और आर्थिक मंदी के कारण कई लोग बिल भरने में असमर्थ हैं, ऐसे में सीधे बैंक खाते फ्रीज करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। हालांकि, विभाग का कहना है कि वे केवल उन्हीं पर कार्रवाई कर रहे हैं जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद जानबूझकर भुगतान नहीं कर रहे हैं।
निष्कर्ष
जबलपुर में बिजली विभाग की यह सख्ती स्पष्ट संदेश देती है कि अब ‘मुफ्त’ या ‘उधार’ की बिजली का समय खत्म हो चुका है। 174 बैंक खातों को फ्रीज करना एक शुरुआत है, और आने वाले दिनों में यह आंकड़ा बढ़ सकता है। यह कार्रवाई बिजली कंपनी की वित्तीय सेहत सुधारने में तो मदद करेगी ही, साथ ही ईमानदारी से बिल भरने वाले उपभोक्ताओं के प्रति न्याय भी सुनिश्चित करेगी।





