दूषित सब्जियों पर हाई कोर्ट सख्त: जबलपुर की थाली में ‘नाले का जहर’
जबलपुर, जिसे महाकौशल की राजधानी और ‘संस्कारधानी’ कहा जाता है, इन दिनों एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की खबरों से सुर्खियों में है। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अब जबलपुर में ‘जहरीली सब्जियों’ का मुद्दा गरमा गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्य पीठ (जबलपुर) ने शहर के आसपास के इलाकों में नाले के गंदे पानी से उगाई जा रही सब्जियों पर कड़ा रुख अपनाया है। 16 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जबलपुर शहर के उपनगरीय इलाकों, विशेषकर परियट, अधारताल, और ग्वारीघाट के आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती होती है। आरोप है कि सिंचाई के लिए स्वच्छ पानी के बजाय, किसान सीधे तौर पर शहर के गंदे नालों और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले दूषित पानी का उपयोग कर रहे हैं।
हाल ही में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कुछ स्वतंत्र लैब की जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए:
- इन सब्जियों में लेड (Lead), कैडमियम (Cadmium) और आर्सेनिक जैसे भारी धातुओं (Heavy Metals) की मात्रा मानक सीमा से कई गुना अधिक पाई गई।
- नाले के पानी में मौजूद मल-मूत्र और औद्योगिक कचरे के कारण इन सब्जियों में घातक बैक्टीरिया और रसायनों का समावेश हो रहा है।
हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस ने कहा कि “प्रशासन केवल स्वच्छता के विज्ञापन करने में व्यस्त है, जबकि आम आदमी की थाली में जहर परोसा जा रहा है।” कोर्ट ने इस मामले में निम्नलिखित प्रमुख निर्देश दिए हैं:
- कलेक्टर को तलब: कोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त से पूछा है कि शहर के नालों का पानी सीधे खेतों तक कैसे पहुंच रहा है? क्या इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर अब तक कोई कार्रवाई की गई?
- सब्जी मंडियों की जांच: हाई कोर्ट ने खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) को आदेश दिया है कि वे शहर की प्रमुख मंडियों से सब्जियों के रैंडम सैंपल लें और उनकी लैब टेस्टिंग कराएं।
- STP की कार्यक्षमता पर सवाल: कोर्ट ने पूछा कि शहर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) क्या केवल कागजों पर चल रहे हैं? यदि सीवेज ट्रीटमेंट सही से हो रहा है, तो नाले का पानी जहरीला क्यों है?
स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी दूषित सब्जियों के सेवन से शहर में बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। भारी धातुओं के शरीर में पहुंचने से कैंसर, किडनी फेलियर, लिवर की बीमारियां और बच्चों के मानसिक विकास में रुकावट जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जबलपुर के अस्पतालों में पिछले कुछ महीनों में पेट और त्वचा संबंधी रोगों के मरीजों में 20% की बढ़ोतरी देखी गई है।
प्रशासन का बचाव और भविष्य की कार्रवाई
हाई कोर्ट की फटकार के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम अब हरकत में आए हैं। प्रशासन ने तर्क दिया है कि वे किसानों को जागरूक कर रहे हैं कि वे नाले के पानी का उपयोग न करें। साथ ही, कुछ क्षेत्रों में अवैध मोटर पंपों को जब्त करने की कार्रवाई भी शुरू की गई है।
हालांकि, जानकारों का कहना है कि जब तक शहर के ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह ठीक नहीं किया जाता और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपनी पूरी क्षमता से नहीं चलाया जाता, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।
निष्कर्ष: ‘स्वच्छता’ बनाम ‘शुद्धता’
जबलपुर की यह घटना हमें याद दिलाती है कि किसी शहर का ‘स्मार्ट’ होना केवल चौड़ी सड़कों और लाइटिंग से नहीं होता, बल्कि वहां के नागरिकों को मिलने वाले शुद्ध पानी और भोजन से होता है। हाई कोर्ट का यह हस्तक्षेप शहरवासियों के लिए उम्मीद की एक किरण है। अब देखना यह होगा कि 20 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई तक प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।




