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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का क्रांतिकारी फैसला: सरकारी कर्मचारियों को प्रोबेशन पीरियड में मिलेगा 100% वेतन; 70-80-90% का नियम ‘अवैध’ घोषित

जबलपुर: मध्यप्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और भविष्य में सरकारी सेवा में आने वाले युवाओं के लिए आज का दिन उत्सव जैसा है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के उस विवादास्पद नियम को असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया है, जिसके तहत नवनियुक्त कर्मचारियों को प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) के दौरान उनके वेतन का केवल 70%, 80% और 90% हिस्सा ही दिया जाता था। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि समान कार्य के लिए समान वेतन का अधिकार मौलिक है और इसे किसी भी नियम से कम नहीं किया जा सकता।

क्या था विवादित नियम?

साल 2019 में तत्कालीन राज्य सरकार ने सिविल सेवा नियमों में संशोधन किया था। इसके तहत यह प्रावधान किया गया था कि सीधी भर्ती से नियुक्त होने वाले कर्मचारियों को पहले साल वेतन का 70%, दूसरे साल 80% और तीसरे साल 90% भुगतान किया जाएगा। तीन साल की परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण होने के बाद ही उन्हें 100% यानी पूर्ण वेतन मिलना शुरू होता था। इस नियम के खिलाफ प्रदेश भर के हजारों कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।

हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी: “यह शोषण है”

हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने अपने फैसले में प्रमुख रूप से निम्नलिखित बातें कहीं:

  1. समान कार्य, समान वेतन: जब एक नया कर्मचारी अपने सीनियर के बराबर ही काम कर रहा है और उतनी ही जिम्मेदारी निभा रहा है, तो उसके वेतन में कटौती करना ‘समानता के अधिकार’ (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन है।
  2. दास्ता के समान: कोर्ट ने कहा कि पूर्ण योग्यता के साथ चयनित होने के बाद कर्मचारी को कम वेतन देना एक प्रकार का आर्थिक शोषण है।
  3. नियम अवैध: अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार के पास ऐसा कोई ठोस तर्क नहीं था जिससे यह साबित हो सके कि 70-90% का यह फॉर्मूला क्यों जरूरी था। अतः इस नियम को ‘अल्ट्रा वायर्स’ (कानून की शक्तियों के बाहर) घोषित कर दिया गया।

फैसले का बड़ा असर: एरियर्स का होगा भुगतान

हाईकोर्ट ने केवल नियम रद्द नहीं किया है, बल्कि सरकार को निर्देश दिया है कि:

  • जिन कर्मचारियों का प्रोबेशन पीरियड के दौरान वेतन काटा गया है, उन्हें उस राशि का एरियर्स (बकाया) दिया जाए।
  • वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को अब से तत्काल प्रभाव से 100% वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
  • यह फैसला उन सभी विभागों पर लागू होगा जहाँ यह विवादास्पद नियम प्रभावी था।

लाखों कर्मचारियों को मिलेगा आर्थिक लाभ

इस फैसले से मध्यप्रदेश के शिक्षक, पुलिसकर्मी, पटवारी, क्लर्क और अन्य संवर्गों के लगभग 2 लाख से अधिक कर्मचारी सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सरकार पर इससे करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा, लेकिन यह कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने वाला कदम है।

युवाओं में खुशी की लहर

जबलपुर, इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है। छात्रों का कहना है कि चयन के बाद भी तीन साल तक कम वेतन में गुजारा करना बहुत कठिन होता था, खासकर उन लोगों के लिए जो दूसरे शहरों से आकर नौकरी करते हैं। अब उन्हें जॉइनिंग के पहले दिन से ही पूरा सम्मान और पूरा वेतन मिलेगा।

आगे क्या?

कानूनी जानकारों का मानना है कि राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। हालाँकि, हाईकोर्ट के इस तार्किक फैसले को पलटना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट नहीं जाती है, तो वित्त विभाग को जल्द ही नए वेतनमान के क्रियान्वयन के लिए अधिसूचना जारी करनी होगी।

निष्कर्ष

हाईकोर्ट का यह फैसला मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में मील का पत्थर साबित होगा। इसने यह स्थापित कर दिया है कि “लोक कल्याणकारी राज्य” में कर्मचारियों के अधिकारों का हनन प्रशासनिक बचत के नाम पर नहीं किया जा सकता।

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