जबलपुर के कबाड़खाने पर NGT का ‘हथौड़ा’: ग्रीन जोन में शिफ्ट होगा शहर का सबसे प्रदूषित इलाका; नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के कड़े निर्देश— ‘प्रदूषण मुक्त करो या कार्रवाई झेलो’
जबलपुर शहर के बीचों-बीच स्थित कबाड़खाना क्षेत्र के लिए अब अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए आदेश दिया है कि शहर के भीतर चल रही इन कबाड़ दुकानों और अवैध गोदामों को तत्काल प्रभाव से ‘ग्रीन जोन’ (निर्धारित औद्योगिक या बाहरी क्षेत्र) में शिफ्ट किया जाए।
NGT की सेंट्रल बेंच ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आबादी वाले क्षेत्रों में चल रही इन गतिविधियों ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को जो नुकसान पहुँचाया है, उसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन को एक निश्चित समय सीमा के भीतर इस पूरे इलाके को प्रदूषण मुक्त (Pollution Free) करने और जमीन के पुनरुद्धार (Remediation) के निर्देश दिए गए हैं।
क्यों सख्त हुआ NGT? (प्रदूषण की भयावह तस्वीर)
जबलपुर का कबाड़खाना दशकों से शहर के लिए ‘नासूर’ बना हुआ है। NGT ने अपनी सुनवाई के दौरान पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर गौर किया, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे:
- मृदा और जल प्रदूषण: कबाड़ के तौर पर आने वाली पुरानी गाड़ियों, बैटरियों और इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट (E-Waste) से निकलने वाला एसिड और जहरीला तेल सीधे जमीन में समा रहा है। इससे आसपास के क्षेत्रों का भूजल (Ground Water) पूरी तरह दूषित हो चुका है।
- अवैध रूप से जलाया जा रहा कचरा: कीमती धातुएं निकालने के लिए कबाड़खानों में अक्सर टायर और प्लास्टिक के तार जलाए जाते हैं, जिससे शहर की वायु गुणवत्ता (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुँच जाती है।
- रिहाइशी इलाकों में खतरा: संकरी गलियों में कबाड़ के ऊंचे ढेरों के कारण यहाँ हमेशा आगजनी का खतरा बना रहता है और एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड का पहुँचना असंभव होता है।
NGT के आदेश के मुख्य बिंदु
ट्रिब्यूनल ने जबलपुर जिला प्रशासन, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को संयुक्त रूप से निम्नलिखित जिम्मेदारियां सौंपी हैं:
- तत्काल शिफ्टिंग: शहर की सीमा के भीतर चल रहे सभी कबाड़ गोदामों को चिन्हित कर उन्हें शहर से बाहर आवंटित ‘ग्रीन/इंडस्ट्रियल जोन’ में स्थानांतरित किया जाए।
- भारी जुर्माना (Environmental Compensation): जिन कबाड़ संचालकों ने नियमों का उल्लंघन कर पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया है, उन पर ‘प्रदूषक भुगतान करे’ (Polluter Pays Principle) के तहत भारी जुर्माना लगाया जाए।
- जमीन की सफाई: कबाड़खाना खाली होने के बाद उस जमीन का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाए ताकि वहां दोबारा हरियाली विकसित की जा सके।
- निगरानी तंत्र: प्रशासन को हर 15 दिन में एनजीटी को ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATR) पेश करनी होगी।
प्रशासन की तैयारी: नया ठिकाना कहाँ?
NGT के आदेश के बाद नगर निगम प्रशासन ने हलचल तेज कर दी है। कबाड़खाना संचालकों को शहर से बाहर शिफ्ट करने के लिए कटंगी रोड या बायपास के पास नई जगह आवंटित करने पर विचार किया जा रहा है।
- व्यापारियों का विरोध: दूसरी ओर, कबाड़ व्यापारियों का तर्क है कि अचानक शिफ्टिंग से उनका व्यवसाय ठप हो जाएगा और हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी छिन जाएगी। वे प्रशासन से बुनियादी सुविधाओं वाले ‘क्लस्टर’ की मांग कर रहे हैं।
- बुलडोजर की चेतावनी: प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जो संचालक स्वेच्छा से शिफ्ट नहीं होंगे, उनके अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए बल प्रयोग किया जाएगा।
निष्कर्ष: स्वच्छ जबलपुर की ओर एक कदम
जबलपुर को ‘महानगर’ बनाने की दिशा में कबाड़खाने की शिफ्टिंग एक अनिवार्य कदम है। एनजीटी का यह निर्देश केवल एक अदालती आदेश नहीं, बल्कि शहर के नागरिकों के लिए ‘सांस लेने योग्य हवा’ का अधिकार सुरक्षित करने का प्रयास है। यदि प्रशासन इसे ईमानदारी से लागू करता है, तो जबलपुर का यह हिस्सा भविष्य में शहर के नए ‘फेफड़े’ (ग्रीन लंग्स) के रूप में विकसित हो सकता है।




