भविष्य का भोजन हैं ‘मोटे अनाज’: जबलपुर JNKVV में तीन दिवसीय मिलेट्स फेस्टिवल का भव्य समापन
जबलपुर: कृषि नवाचार और सेहत का संगम जबलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV) के विशाल परिसर में आयोजित तीन दिवसीय ‘संभागीय मिलेट्स फेस्टिवल’ और कृषि मेले का आज गरिमामय समापन हुआ। इस महोत्सव ने न केवल जबलपुर बल्कि पूरे महाकौशल क्षेत्र के किसानों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों को एक साझा मंच प्रदान किया। समापन समारोह के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में ‘श्री अन्न’ (मिलेट्स) न केवल पोषण का आधार हैं, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने का सबसे सशक्त माध्यम भी हैं।
मिलेट्स फेस्टिवल के मुख्य आकर्षण
इस तीन दिवसीय आयोजन में मिलेट्स (कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा) को लेकर कई तरह की गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिन्होंने आम जनता और किसानों का ध्यान अपनी ओर खींचा:
- एग्री-स्टार्टअप्स की प्रदर्शनी: मेले में 50 से अधिक एग्री-स्टार्टअप्स ने अपने स्टॉल लगाए थे। यहाँ मिलेट्स से बने आधुनिक उत्पाद जैसे कुकीज़, पास्ता, नूडल्स और रेडी-टू-ईट मिक्स प्रदर्शित किए गए, जो यह दर्शाते हैं कि पारंपरिक अनाज को आधुनिक बाजार के अनुसार कैसे ढाला जा सकता है।
- लाइव डेमो और तकनीक: विश्वविद्यालय के प्रक्षेत्र (Fields) पर किसानों को उन उन्नत किस्मों का लाइव प्रदर्शन दिखाया गया जो कम पानी और कम लागत में अधिक पैदावार देती हैं। वैज्ञानिकों ने मिट्टी के स्वास्थ्य और जैविक खाद के उपयोग पर भी विशेष सत्र आयोजित किए।
किसानों के लिए पाठशाला: आय बढ़ाने के गुर
फेस्टिवल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘किसान संगोष्ठी’ रहा, जहाँ विशेषज्ञों ने किसानों की शंकाओं का समाधान किया।
- प्रसंस्करण (Processing) पर जोर: वैज्ञानिकों ने समझाया कि यदि किसान सीधे अनाज बेचने के बजाय उसका मूल्य संवर्धन (Value Addition) करें—जैसे आटा बनाना या दलिया तैयार करना—तो उन्हें बाजार में चार गुना अधिक दाम मिल सकते हैं।
- सरकारी योजनाओं की जानकारी: समापन सत्र में जिला प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारियों ने मिलेट्स की खेती के लिए मिलने वाली सब्सिडी, बीज किट और बाजार लिंकेज (Market Linkage) की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सेहत और स्वाद का अनूठा मेल
इस मेले में केवल खेती की बात नहीं हुई, बल्कि ‘मिलेट्स फूड जोन’ के जरिए लोगों को इन अनाजों के स्वास्थ्य लाभों से भी परिचित कराया गया।
- पोषण का पावरहाउस: विशेषज्ञों ने बताया कि मधुमेह (Diabetes) और मोटापे जैसी बीमारियों से लड़ने में कोदो-कुटकी जैसे अनाज रामबाण हैं। मेले में आए स्कूली बच्चों और युवाओं को जंक फूड छोड़कर ‘श्री अन्न’ अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
- व्यंजन प्रतियोगिता: अंतिम दिन महिला स्व-सहायता समूहों के बीच मिलेट्स व्यंजन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें रागी के लड्डू और बाजरे की खिचड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजनों को आधुनिक तड़के के साथ पेश किया गया।
कुलपति का संबोधन और भविष्य का रोडमैप
समापन समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि JNKVV का लक्ष्य केवल शोध करना नहीं, बल्कि उस शोध को किसान के खेत तक पहुँचाना है।
- बीज बैंक की स्थापना: उन्होंने घोषणा की कि विश्वविद्यालय आने वाले समय में मिलेट्स के बीजों का एक विशाल बैंक स्थापित करेगा ताकि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज आसानी से उपलब्ध हो सकें।
- प्रशिक्षण कार्यक्रम: आने वाले महीनों में संभाग के हर जिले में विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ युवाओं को मिलेट्स प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए तकनीकी सहायता दी जाएगी।
निष्कर्ष
जबलपुर में आयोजित यह मिलेट्स फेस्टिवल केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि एक ‘जन आंदोलन’ की शुरुआत जैसा नजर आया। तीन दिनों में हजारों की संख्या में पहुँचे किसानों और शहरी नागरिकों का उत्साह यह बताने के लिए काफी है कि अब थाली में फिर से पारंपरिक और पौष्टिक अनाज की वापसी हो रही है। JNKVV का यह प्रयास आने वाले समय में जबलपुर को मध्य प्रदेश के मिलेट्स हब के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा।





