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भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त का कड़ा प्रहार: सिवनी में 5000 की रिश्वत लेते रोजगार सहायक रंगे हाथों गिरफ्तार, मजदूरी के भुगतान के बदले मांगी थी ‘कमीशन’

जबलपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले सिवनी जिले में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने एक सोची-समझी घेराबंदी करते हुए ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक को 5000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब आरोपी रोजगार सहायक एक गरीब मजदूर और ग्रामीण से उसके हक की मजदूरी और विकास कार्यों के भुगतान के बदले “सेवा शुल्क” की मांग कर रहा था।

संस्कारधानी जबलपुर से गई लोकायुक्त टीम की इस त्वरित कार्रवाई से पूरे संभाग के सरकारी महकमों में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला? (शिकायत से ट्रैप तक)

घटना सिवनी जिले की एक ग्राम पंचायत की है। जानकारी के अनुसार, पीड़ित ग्रामीण ने पंचायत के माध्यम से किए गए कार्यों और अपनी बकाया मजदूरी के भुगतान के लिए कई बार चक्कर काटे थे।

  • रिश्वत की मांग: आरोप है कि ग्राम रोजगार सहायक (GRS) ने पीड़ित का भुगतान पोर्टल पर अपडेट करने और चेक जारी करवाने के बदले 5000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
  • लोकायुक्त में शिकायत: बार-बार की प्रताड़ना से तंग आकर ग्रामीण ने जबलपुर लोकायुक्त कार्यालय में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। लोकायुक्त एसपी ने शिकायत की पुष्टि के लिए एक प्रारंभिक जांच की, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की बात सही पाई गई।
  • कैमिकल लगे नोटों का जाल: योजना के मुताबिक, लोकायुक्त टीम ने पीड़ित को पाउडर (फिनोलफ्थलीन) लगे हुए नोट दिए और आरोपी के पास भेजा।

रंगे हाथों गिरफ्तारी का घटनाक्रम

जैसे ही पीड़ित ने रोजगार सहायक को पंचायत भवन या उसके पास स्थित स्थान पर रिश्वत के पैसे थमाए, वैसे ही सादे कपड़ों में तैनात लोकायुक्त टीम ने उसे दबोच लिया।

  1. हाथ हुए गुलाबी: जब लोकायुक्त टीम ने आरोपी के हाथ सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलवाए, तो पानी का रंग तुरंत गुलाबी हो गया। यह इस बात का वैज्ञानिक प्रमाण है कि आरोपी ने रिश्वत के उन नोटों को छुआ था।
  2. दस्तावेज जब्त: टीम ने आरोपी के पास से भुगतान से संबंधित फाइलें और मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह किसी और के इशारे पर या किसी संगठित गिरोह के रूप में यह वसूली कर रहा था।

भ्रष्टाचार का छोटा मोहरा या बड़ी साजिश?

पंचायती राज व्यवस्था में रोजगार सहायक सबसे जमीनी स्तर का कर्मचारी होता है। इस मामले ने एक बार फिर उजागर किया है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ गरीबों तक पहुँचने से पहले ही ‘कमीशनखोरी’ की भेंट चढ़ जाता है।

  • धाराओं के तहत मामला: लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी रोजगार सहायक के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
  • संभाग में बढ़ती कार्रवाई: जबलपुर लोकायुक्त टीम पिछले कुछ समय से बेहद सक्रिय है। इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि चाहे राशि 5000 हो या 5 लाख, भ्रष्टाचार के प्रति शासन की नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है।

ग्रामीणों में संतोष और प्रशासनिक चेतावनी

कार्रवाई के बाद संबंधित गांव और क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे-छोटे कामों के लिए रिश्वत मांगना यहाँ एक आम बात हो गई थी। जिला प्रशासन ने भी इस घटना के बाद अन्य कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी जारी की है कि यदि कोई भी सरकारी सेवक अनुचित लाभ लेते पाया गया, तो उस पर कठोरतम अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

सिवनी में हुई यह लोकायुक्त की कार्रवाई सिस्टम की सफाई की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है। 5000 रुपये की यह रिश्वत उस मजदूर की मेहनत का हिस्सा थी जिसने पसीना बहाकर काम किया था। जब तक सरकारी तंत्र से ऐसे ‘रिश्वतखोर’ बाहर नहीं होंगे, तब तक वास्तविक विकास अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुँच पाएगा।

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