जबलपुर एकलव्य हॉस्टल में हड़कंप: दीवार फांदकर लापता हुए तीन आदिवासी छात्र, CCTV फुटेज ने बढ़ाई चिंता, पुलिस की कई टीमें तलाश में जुटीं
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित शासकीय एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (Eklavya Hostel) से तीन आदिवासी छात्रों के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हॉस्टल की कड़ी सुरक्षा को धता बताते हुए छात्र देर रात दीवार फांदकर बाहर निकल गए। सुबह जब अटेंडेंस के दौरान छात्र अनुपस्थित मिले, तो हॉस्टल प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और जनजातीय कार्य विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे।
CCTV कैमरों की जांच में छात्र बैग टांगे हुए दीवार फांदते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसके बाद से ही पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है।
CCTV फुटेज: आधी रात की ‘फरारी’
हॉस्टल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले दृश्य सामने आए हैं। फुटेज के अनुसार, तीनों छात्र रात के अंधेरे में एक साथ हॉस्टल की पीछे की दीवार की ओर बढ़ते हैं। उन्होंने अपने पीठ पर स्कूल बैग टांगे हुए थे, जिससे यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि छात्रों ने भागने की योजना पहले से ही बना रखी थी।
- समय: छात्र रात लगभग 1:30 से 2:00 बजे के बीच दीवार फांदते नजर आ रहे हैं।
- तैयारी: बैग में कपड़े और कुछ जरूरी सामान होने की पुष्टि हुई है, जो यह दर्शाता है कि यह अचानक लिया गया फैसला नहीं था।
हॉस्टल की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
एकलव्य हॉस्टल विशेष रूप से आदिवासी मेधावी छात्रों के लिए बनाया गया है, जहाँ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने का दावा किया जाता है। छात्रों के इस तरह गायब होने से प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं:
- वॉर्डन और गार्ड की लापरवाही: रात के समय जब सुरक्षा गार्ड तैनात थे, तब छात्रों ने दीवार कैसे फांद ली? क्या उस समय गार्ड सो रहे थे?
- सुरक्षा दीवार की ऊंचाई: क्या हॉस्टल की बाउंड्री वॉल इतनी नीची है कि उसे बच्चे आसानी से पार कर सकें?
- मानसिक दबाव या घर की याद: शुरुआती जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या छात्र हॉस्टल के अनुशासन या पढ़ाई के दबाव में थे, या फिर वे घर जाने की जिद के कारण यह कदम उठा बैठे।
पुलिस की कार्रवाई: तलाश में जुटीं टीमें
जबलपुर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल ‘गुमशुदगी’ का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की तीन टीमें अलग-अलग दिशाओं में काम कर रही हैं:
- रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड: आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि छात्रों ने शहर छोड़ने के लिए कौन सा साधन अपनाया।
- परिजनों से संपर्क: पुलिस ने लापता छात्रों के गृह ग्राम और उनके माता-पिता से संपर्क किया है, लेकिन अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है।
- मित्रों से पूछताछ: हॉस्टल में रहने वाले अन्य छात्रों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता चले कि क्या उन्होंने भागने से पहले किसी से अपनी योजना साझा की थी।
प्रशासन का रुख: जांच कमेटी गठित
जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। हॉस्टल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और एक आंतरिक जांच कमेटी गठित कर दी गई है। यदि सुरक्षा में कोई गंभीर चूक पाई जाती है, तो संबंधित कर्मचारियों पर निलंबन की गाज गिर सकती है।
निष्कर्ष
नाबालिग आदिवासी छात्रों का इस तरह गायब होना सुरक्षा और प्रबंधन की एक बड़ी विफलता है। वर्तमान में पुलिस की प्राथमिकता छात्रों को सुरक्षित वापस लाना है। इस घटना ने प्रशासन को मजबूर कर दिया है कि वे सरकारी हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों की काउंसलिंग प्रक्रिया की समीक्षा करें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।





