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मकर संक्रांति पर पुलिस का ‘सायबर अवेयरनेस’ अभियान

जबलपुर में मकर संक्रांति का पर्व केवल पतंगबाजी और तिल-गुड़ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस वर्ष जबलपुर पुलिस ने इसे एक अनूठे ‘सायबर अवेयरनेस’ (Cyber Awareness) अभियान में बदल दिया। जैसे-जैसे डिजिटल दुनिया का विस्तार हो रहा है, ठगी के तरीके भी बदल रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में शहर के प्रमुख चौराहों और पतंगबाजी के मैदानों पर लोगों को जागरूक करने के लिए यह विशेष पहल की गई।

अभियान का मुख्य उद्देश्य: “पतंग की डोर, सुरक्षा की ओर”

जबलपुर पुलिस ने इस अभियान को एक दिलचस्प स्लोगन दिया—“पतंग की डोर थामें, लेकिन सायबर ठगों की डोर से बचें।” मकर संक्रांति पर भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस ने इसे एक बड़े अवसर के रूप में लिया ताकि अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचा जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल लेन-देन के दौरान होने वाली चूकों और सोशल मीडिया पर बढ़ते अपराधों के प्रति जनता को सतर्क करना था।

‘डिजिटल अरेस्ट’ और नए खतरों पर प्रहार

पिछले कुछ समय में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस अभियान के दौरान पुलिस ने विशेष रूप से इसके बारे में जानकारी दी:

  • नकली पुलिस अधिकारी: ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और लोगों को डराते हैं कि उनके नाम से कोई नशीला पार्सल मिला है।
  • भय का माहौल: पुलिस ने लोगों को समझाया कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर पैसे की मांग नहीं करती।

पतंगों और पेम्फलेट्स के जरिए संदेश

इस अभियान की सबसे अनोखी बात यह थी कि पुलिस ने जागरूकता के संदेश लिखी हुई पतंगें आसमान में उड़ाईं और वितरित कीं।

  • सावधानी के संदेश: इन पतंगों पर “OTP शेयर न करें”, “अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें” और “सायबर हेल्पलाइन नंबर 1930” जैसे संदेश लिखे थे।
  • युवाओं पर ध्यान: चूंकि पतंगबाजी में युवाओं की संख्या अधिक होती है, इसलिए उन्हें सोशल मीडिया प्राइवेसी और ‘हनीट्रैप’ जैसे खतरों के बारे में भी पंपलेट्स बाँटकर जानकारी दी गई।

क्यूआर कोड (QR Code) और वित्तीय धोखाधड़ी

मकर संक्रांति के मेलों और बाजारों में लोग डिजिटल पेमेंट का अधिक उपयोग करते हैं। पुलिस ने दुकानदारों और ग्राहकों को “QR Code Scam” के बारे में बताया। पुलिस कर्मियों ने डेमो देकर समझाया कि क्यूआर कोड हमेशा पैसे भेजने के लिए स्कैन किया जाता है, पैसे पाने के लिए नहीं। यदि कोई आपको पैसे भेजने के बहाने क्यूआर कोड स्कैन करने को कहे, तो वह ठग हो सकता है।

सायबर हेल्पलाइन 1930 का प्रचार

पुलिस ने इस बात पर जोर दिया कि यदि कोई व्यक्ति ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे ‘गोल्डन ऑवर’ (शुरुआती 1-2 घंटे) के भीतर कार्रवाई करनी चाहिए।

  • लोगों को बताया गया कि यदि पैसा कट जाए, तो तुरंत 1930 डायल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। त्वरित सूचना मिलने पर बैंक खाते को फ्रीज कर पैसा वापस मिलने की संभावना 90% तक बढ़ जाती है।

जनभागीदारी और पुलिस की उपस्थिति

जबलपुर के भेड़ाघाट, ग्वारीघाट और मालवीय चौक जैसे प्रमुख स्थानों पर पुलिस की विशेष ‘सायबर सेल’ की टीमें तैनात रहीं। पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को संक्रांति की शुभकामनाओं के साथ-साथ सायबर सुरक्षा के टिप्स दिए। स्कूली छात्रों ने भी इस अभियान में शामिल होकर नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के तरीके बताए।


निष्कर्ष

जबलपुर पुलिस का यह सायबर अवेयरनेस अभियान इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक पुलिसिंग केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराध को रोकने (Prevention) पर भी केंद्रित है। त्योहार के उल्लास के बीच इस तरह की सतर्कता ने नागरिकों को यह अहसास कराया कि उनकी डिजिटल सुरक्षा उनके खुद के हाथों में है।

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